DHIMAN
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Mera dard kisi k hansnay ki waja zaroor ban sakta hai….
Lekin meri hansi kisi k dard ki waja nhi banni chahiye….!
Lagta h maa-baap ne bachpan me khilone nahi dilaye Tabhi toh badi hokar pagli humare dil se hi khel gayi... !
Kehty Hain Bina Mehnat kiye kuch Paa Nahi Sakty , “Dost” Pata Nahi Gham Paany k liye kon Si Mehnat ki thi Hum Nay...!
Tu ek bhi baar humse mili nahi warna, Tere hi dil ko tere hi khilaaf kar dete..!!
मुकाम वो चाहिए की जिस दिन भी हारु , उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो...!
पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों…… ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही..!
अच्छा लगता हैं तेरा नाम मेरे नाम के साथ, जैसे कोई खूबसूरत सुबह जुड़ी हो, किसी हसीन शाम के साथ !
Wo Mujhse Door Rehkar Khush Hai Toh Rehne Do Use,
Mujhe Chahat Se Zyada Uski Muskurahat Pasand hai.
हम से खेलती रही दुनिया ताश के पत्तो की तरह, जिसने जीता उसने भी फेका जिसने हारा उसने भी फेका !
जहाँ प्रेम है वहां जीवन है....
(Where there is love there is life....)
कर लो इनकार जब तक जिंदा हूँ,
फिर ना कहना...
चला गया पागल दिल में यादें छोड़ कर...!
मुस्करा कर देखो तो सारा जहाॅ रंगीन है वर्ना भीगी पलको से तो आईना भी धुधंला नजर आता है..!
किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस 'मक्खी' की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोडकर केवल जख्म पर ही बैठती है।
जिदंगी मे कभी भी किसी को बेकार मत समझना क्योकी बंद पडी घडी भी दिन में दो बार सही समय बताती है।
हम से खेलती रही दुनिया ताश के पत्तो की तरह,
जिसने जीता उसने भी फेका जिसने हारा उसने भी फेका !
खुद पर भरोसे का हुनर सीख ले
लोग जितने भी सच्चे हो साथ छोड़ ही जाते हैं!
विकल्प मिलेंगे बहुत, मार्ग भटकाने के लिए, संकल्प एक ही काफ़ी है, मंज़िल तक जाने के लिए !
तेरी बेरुखी में लाखों पैगाम लिखता हूँ,
तेरे ग़म में गुज़री बातें तमाम लिखता हूँ…!!
हवाएं ज़ोर लगाती है बनकर आँधियाँ,
दिन में होने लगे अँधेरा,उसे में शाम लिखता हूँ…!!
बहूत ही अजीब खेल है यह मोहब्बत
जो हारा वो फिर से ना खेला
और जो जीता उसने भी तौबा करली"...!
जिंदगी एक हसीन ख्वाब है, जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिए,
गम खुद ही खुशी में बदल जाएंगे, सिर्फ मुस्कान की आदत होनी चाहिए।
सोच समझ कर रखना हमारी "सल्तनत"में क़दम; हमारी मोहबत की क़ैद की "ज़मानत"नहीं होती !!
Maa ke Deedar ko Aankhe Aaj is Qadar Taras Rahi he...
Jese Intazar ho Banzar zameen ko Muddat se barish ka....!
यह बारिश उसे भी रुलाती होगी,
कभी कभी मेरी भी याद दिलाती होगी,
उसने जब कहा था मुझे खुद को भूल जाने को
हर एक बारिश की बूँद उसे उस पल की याद दिलाती होगी... !
आज रोटी के पीछे भागता हूँ,
तो याद आता है मुझे रोटी खिलने के लिए
माँ मेरे पीछे भागती थी...!
कुछ लोग पसंद करने लगे है
अल्फाज मेरे;
मतलब मोहब्बत में बरबाद
और भी हुए है!
किसी ने यूँ ही पूछ लिया हमसे
कि दर्द की कीमत क्या है;
हमने हँसते हुए कहा,
"पता नहीं! कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।
बहुत कोशिश करता हूँ
भूलने की उन दिनों को
जब भूख लगती थी
पर खाने को कुछ होता ही नहीं था
हर पल झनझना देते हैं वो पल
मैं छोड़ना भी नहीं चाहता उन यादों को
ऐसा नहीं है कि
अब भूख नहीं लगती
पर बहुत फरक है दोनों में।।
मैंने कल शब चाहतों की
सब किताबें फाड़ दी;
सिर्फ एक कागज़ पर
लफ्जे माँ रहने दिया।
"कफ़न "- भी क्या चीज़ है !
जिसने बनाया उसने बेच दिया ,
जिसने खरीदा उसने इस्तेमाल ही नही किया !
और जिसने इस्तेमाल किया उसे मालूम ही नहीँ !
यहाँ हर किसी को दरारों में
झाँकने की आदत है;
दरवाजा खोल दो,
कोई पूछने भी नही आयेगा।
करम ही करना है तुझको
तो ये करम कर दे;
मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों
को कम कर दे।
अब सज़ा दे ही चुके हो
तो मेरा हाल ना पूछना,
गर मैं बेगुनाह निकला तो
तुम्हे अफ़सोस बहुत होगा…!
दर्द की अपनी भी एक अदा है....
वो सहने वालो पे ही फ़िदा है... !
धोखा, वफ़ा, फरेब ज़माने में रह गए..
हम दोस्ती का फ़र्ज़ निभाने में रह गए..
जो साथ चले थे वो आगे निकल गए..
हम रास्ते का पत्थर हटाने में रह गए...!!!
कोई तो है जो फैसला करता है
पत्थरों के मुकद्दर का..., ..
किसे ठोकरों पे रखना है,
किसे भगवान होना है.!!!
परवाह नही चाहे
जमाना कितना भी खिलाफ हो,
चलूगा उसी राह पर
जो सीधी ओर साफ़ हो..!
मै रिश्ते संजोने के लिये
झुकता ही गया ,और
कुछ लोग इसे मेरी
ओकात समझ बैठे।
यही सबब है के डरतीं हैं,
आँधियाँ मुझ से...
मैं वो चराग़ हूँ, जिस ने
हवा जला दी थी...!
वक्त को कैद करने की ख्वाहिश,
दिल ही दिल में रह गयी।
कोशिश जीने की बहुत की, मगर
जिंदगी पेट भरने में ही ढह गयी।
मेरे शहर में
खुदाओं की कमी नहीं,
दिक्कत तो मुझे आज भी
इंसान ढूंढ़ने में आती है...!!
या तो हमें मुकम्मल
चालाकियाँ सिखाई जाए,,,
नहीं तो मासूमों की अलग
बस्तियाँ बसाई जाए!!
"हर फ़िक्र से आज़ाद होते थे
और खुशियाँ इक़ट्ठी होती थीं,
वो दिन भी थे , जब अपनी भी
गर्मियों की छुट्टी होती थीं...."
कितने भी अच्छे
कर्म कर लो ...
तारीफ तो
शमशान में ही होगी...!
याददाश्त का कमज़ोर होना, बुरी बात नहीं है जनाब....
बड़े बेचैन रहते है वो लोग, जिन्हे हर बात याद रहती है.!
Log aksar unhi logo ko hurt karke chle jaate hai.. Jo unke liye har tarah ki takleef sehte hai !
तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है की खुदा
मोहब्बत उनको मिलती है ,जिनको करनी नही आती…!
रिवाज़ तो यही है दुनिया मे मिल जाना और बिछड़ जाना
तुम से कैसे रिश्ता है ना मिलते हो ना बिछड़ते हो….!
Ho Sakti Hy Muhabbt Zindgi Meh Dubara B…
Bas Hosla Ho, Ek Dafa Phir “Barbaad” Hone Ka…!
मेरी मौत का उसे बताना
लेकिन इन अल्फ़ाज़ों में...
तुम्हारा सदियों से जो अरमान था
वो पूरा हो गया.!
जज़बात पर काबू और
वो भी मोहब्बत मे...
तूफान से कहते हो
खामोशी से गुजर जाये...!
आज जो हम
महके महके घूम रहे हैं न
हकीकत में वो हमारे
पिताजी के पसीने की
खुशबु है ..!
क्या सिर्फ इतना ही प्यार था
हम सब में यारो,
साथ बैठना छोड़ दिया तो
याद करना भी छोड़ दिया !
छोटा बनके रहोगें तो, मिलेगी हर बड़ी रहमत दोस्तों बड़ा होने पर तो माँ भी, गोद से उतार देती है...!!
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ “इश्क” मुकम्मल,
इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है...!!
Aag roshni deti hain aur Jalna jameen ko padta… Mohabbat nigahe karti h or tadpna dil ko padta hai....!
ना शौक दीदार का… ना फिक्र जुदाई की, बड़े खुश नसीब हैँ वो लोग जो…मोहब्बत नहीँ करतेँ ...!
“रिश्ता” दिल से होना चाहिए, शब्दों से नहीं, “नाराजगी” शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं!
नफरत ना करना मुझे बुरा लगेगा..
बस प्यार से कह देना अब तेरी ज़रूरत नहीं है...!
ਸਭ ਕਹਿਦੇ ਨੇ ਮੈ ਬਦਲ ਗਿਆ,
ਪਰ ਬਦਲੇ ਜਜਬਾਤ ਨੇ,
ਬਦਲ ਗਏ ਸ਼ਜਨ ਪਿਆਰੇ,
ਤਾਹੀ ਬਦਲੇ ਮੇਰੇ ਹਾਲਤ ਨੇ...!
इश्क़ मोहब्बत तो 1000रो करते है, गम-ए-जुदाई से वो सभी डरते है, हम ना इश्क़ करते है, ना मोहब्बत करते है, बस आप जैसे दोस्तो पे मरते है...!
ਜਿਹੜੇ ਲੋਕ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਬੋਲਣਾ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ
:
:
:
ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ਬਾਰੇ ਬੋਲਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ...!
टूट जाता है गरीबी मे वो रिशता जो खास होता है हजारो यार बनते है जब पैसा पास होता है....!
सूखे होंठों से ही होती हैं मीठी बातें.
प्यास बुझ जाये तो अल्फ़ाज़ और इंसान दोनों बदल जाते है... !
हर लफ्ज़ में छुपा रहता है रंग तेरी बेवफाई का,
फिर भी तुझको मैं वफ़ा खुद को बदनाम लिखता हूँ…!!
वो तो बस Dil की ख्वाहिशतू थी,वरनामेरे शौकतो आज भी, Teri औकात से बडे है !!
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ,
हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की
जीने के लिए काम करता हूँ
या काम करने के लिए जीता हूँ।
ज़िन्दगी अगर दर्द ही है, तो हर दर्द को सहेंगे,
चुप रहना ही अगर महोब्बत है, तोकिसी से कुछ ना कहेंगे,
कभी कोशिश करके देखना तू मुझे भूल जाने की,
नफ़रत बनकर ही सही, अब तो हम तेरे दिल में ही रहेंगे...!
काश ये बात लोग समझ जाये कि,
रिश्तें एक दूसरे का ख्याल रखने के लिए बनाए जाते है..
एक दूसरे का इस्तेमाल करने के लिए नही...!
किस बात का बदला लिया है तुम ने मुझे अपना बना के…
इस तरह तनहा छोड़ा है, की मैं अपना भी न बन सका…!!!
अजीब लगती है शाम कभी कभी,
ज़िन्दगी लगती है बेजान कभी कभी,
समझ आये तो मुझे भी बताना आप,
क्यों करती है यादें परेशान कभी कभी...!
Ahsas-e-Mohabbat Ke Liye toh Bas Itna Hi Kaafi Hai
Tere Begair Bhi Tere Saath Hi Rehti Hoon..!!!
दिल की हालत किसी से कही नहीं जाती,
दिल की हालत आब हमसे सही नहीं जाती,
तड़पती तो होगी वह भी मेरी तरह,
वरना यूं किसी की याद हर पल नहीं आती...!
सुना है के तुम रातों को
देर तक जागते हो..
यादों के मारे हो या
मोहब्बत में हारे हो ?
वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं;
कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं;
दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद;
वो ज़ख्म कैसे दिखाए जो दिखते नहीं।
नहीं तुमसे कोई शिकायत
बस इतनी सी इल्तजा है,
जो हाल कर गए हो
कभी आ कर देख जाना...!!
कोई और गुनाह करवा दे
मुझ से मेरे खुदा,
मोहब्बत करना अब
मेरे बस की बात नहीं ।
खफा नहीँ हूँ तुझसे ए जिन्दगी...
बस जरा सा दिल लगा बैठा हूँ इन उदासियोँ से...!
कोई ताबीज ऐसा दो कि मैं
चालाक हो जांऊ
बहुत नुकसान देती है
मुझे ये सादगी मेरी...!
यहाँ मज़दूर को मरने
की जल्दी यूँ भी है;
कि ज़िंदगी की कश्मकश में
कफ़न महंगा ना हो जाए।
अगर बिकने पे आ जाओ तो
घट जाते हैं दाम अक़सर;
न बिकने का इरादा हो
तो क़ीमत और बढ़ती है...!
पहले इश्क़.....फिर दर्द.....
फिर बेहद नफरत.....
बड़ी तरकीब से तबाह
किया तुमने मुझको...!
ज़िन्दगी लोग जिसे
मरहम-ए-ग़म जानते हैं;
जिस तरह हम ने माँ के बिना गुज़ारी है
वो हम जानते हैं।
सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से..
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!
मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता , समानता , और भाई -चारा सीखाये...!
(I like the religion that teaches liberty, equality and fraternity...)
ऐ अच्छे वक्त
ज़रा धीरे धीरे चल ..
हम ने बुरे वक्त को बहुत
धीरे से गुज़रते देखा है...!
मगरूर नहीं हूँ
बस दूर हो गया हूँ मैं,
उन लोगों से जिन्हें
मेरी कदर नहीं है ...!
यही तय जानकर कूदो,
उसूलों की लड़ाई में...
कि रातें कुछ न बोलेंगी,
चरागों की सफाई में...!
दिल का एहसासअंदर से तो कब के मर चुके है हम,
ए मौत तू भी आजा, लोग सबूत मांगते है।
सहम उठते हैं कच्चे मकान
पानी के खौफ़ से.....
महलों की आरज़ू ये है
की बरसात तेज हो..!
गज़ब की धूप है शहर में...
फिर भी पता नहीं...!
लोगों के दिल यहां...
पिघलते क्यों नहीं..!
समझदार ही करते है
अक्सर गलतिया,
कभी देखा है किसी
पागल को मोहब्बत करते...!
जीने का सहारा है
यह छोटी छोटी खुशियाँ
ख्वाहिशें तो रोज़ यूँही..
बदलती रहती हैं...!
इतिहास गवाह है...
खबर हो जा कबर
खोदते अपने ही है..!
वक़्त ने ज़रा सी
करवट क्या ली
गैरो की लाइन में सबसे आगे
पाया अपनों को...!
कहाँ वक़्त है आज किसी को
किसी जिन्दा इंसान के पास *बैठने* का...
इसीलिए तो सब
मरने के बाद *बैठने* जाते है...!
अल्फाज किसी और
के मैं लाता जरूर हूँ !
पर गहराइयाँ समुन्दर सी
मेरे दिल की है जनाब !!
हर सुबह हर शाम तेरा इंतज़ार किया करते हैं,
हर एक ख्वाब मैं तेरा दीदार किया करते हैं ,
ख्वाहिश तो बहुत हैं जीने की तू जीना सीखा दे,
ये ख्वाहिश पूरी होगी इसी आस मैं जिया करते हैं..!
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया मे अपने
फिर हुआ इश्क़ और हम लावारिश हो गये...!
Usay Hum Chor Den Lekin Bus ik Choti Si Uljhan Hai,
Suna Hai Dil Sy Dharkan Ki Judai Mout Hoti Hai.
भला करने वाले छुप
जाते है भला करके।
याद वही आते है जो
चले जाते है तबाह करके।
इल्ज़ाम तो हर हाल में
काँटों पे ही लगेगा,
ये सोचकर अक्सर -फूल -भी
हमें ज़ख्म दे जातें हैं ..!!!
जज्बात अब हमारे भी बरस पड़े हैं
बे मौसम बारिश की तरह
ये दिल बर्बाद हो जाएगा
गरीब किसान की तरह...!
Kuch Nahi Milta Jitni Marzi Wafa Karlo Kisi Se
Jab Waqt Wafa Na Kare
Toh Wafadar Bhi Bewafa Ho jate Hain...!!
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